देहरादून | दिसंबर 2025 🎯

पब्लिक रिलेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया (PRSI) के तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में लगी प्रदर्शनी ने यह साबित कर दिया कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि संस्कृति, साहस, नवाचार और आत्मनिर्भरता की जीवंत मिसाल भी है। देश-विदेश से आए प्रतिनिधियों के लिए यह प्रदर्शनी किसी यात्रा से कम नहीं रही—एक ऐसी यात्रा, जो पहाड़ की आत्मा से सीधे जुड़ती है।

सोमवार सायं रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ अधिवेशन का समापन हुआ। इस दौरान रूस सहित देशभर से आए 300 से अधिक जनसंपर्क और संचार विशेषज्ञों ने न केवल विचार साझा किए, बल्कि उत्तराखंड की लोक विरासत, विकास और सामर्थ्य को बेहद करीब से महसूस किया।

सरकारी-गैर सरकारी स्टॉल्स में दिखी उत्तराखंड की संपूर्ण तस्वीर 🏔️

देहरादून के सहस्रधारा रोड स्थित द एमराल्ड ग्रैंड होटल में आयोजित इस अधिवेशन में लगभग डेढ़ दर्जन स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने आगंतुकों का मन मोह लिया।
प्रदर्शनी में सूचना एवं लोक संपर्क विभाग, आंचल दूध, उत्तराखंड हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट डेवलपमेंट काउंसिल, मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA), उत्तराखंड ऑर्गेनिक कमोडिटी बोर्ड, मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड, SDRF, भारतीय ग्रामोत्थान संस्था ऋषिकेश, एपण आर्ट ऑफ उत्तराखंड, आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI), राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल और हाउस ऑफ हिमालय जैसे स्टॉल शामिल रहे।
इन स्टॉल्स के माध्यम से धर्म-आध्यात्म, महिला सशक्तीकरण, हस्तशिल्प, आपदा प्रबंधन और विकास की समग्र तस्वीर उभरकर सामने आई।

एमडीडीए: दून में अपने घर का सपना 🏡

एमडीडीए का स्टॉल प्रतिनिधियों के बीच खासा आकर्षण बना रहा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन और उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के नेतृत्व में एमडीडीए देहरादून को स्वच्छ, सुंदर और सुव्यवस्थित शहर बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।
आईएसबीटी और आमवाला तरला जैसी सफल योजनाओं के बाद अब धौलास आवासीय परियोजना, ट्रांसपोर्ट नगर और सहस्रधारा रोड पर EWS, LIG और MIG फ्लैट्स पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सहस्रधारा रोड पर लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से विकसित सिटी फॉरेस्ट पार्क भी शहर की नई पहचान बनता जा रहा है।

आंचल दूध: पौष्टिकता, गुणवत्ता और किसानों की ताकत 🥛

आंचल दूध का स्टॉल भी प्रदर्शनी का प्रमुख आकर्षण रहा। उत्तराखंड सहकारी डेयरी फेडरेशन के इस ब्रांड से प्रदेश के करीब 50 हजार लघु एवं सीमांत किसान जुड़े हैं।
स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधियों ने बताया कि देहरादून में प्रतिदिन 15 हजार लीटर से अधिक आंचल दूध की आपूर्ति की जाती है। आंचल का लक्ष्य किसानों को दुग्ध उत्पादन के साथ-साथ मूल्य संवर्धित डेयरी उत्पादों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना है।

भांग, कंडाली और ऊन से बने उत्पादों ने जीता दिल 🧶

भारतीय ग्रामोत्थान, ऋषिकेश द्वारा लगाए गए स्टॉल पर भांग के रेशे से बने जैकेट और पहाड़ी ऊन के गर्म वस्त्रों ने विशेष आकर्षण पैदा किया।
पिछले 40 वर्षों से इस क्षेत्र से जुड़े रामसेवक रतूड़ी के अनुसार, पारंपरिक और टिकाऊ उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है।

देवभूमि की धरोहर संजो रहा एएसआई 🛕

प्रदर्शनी में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) ने उत्तराखंड के 44 पौराणिक मंदिरों के संरक्षण की जानकारी दी।
एएसआई के श्यामचरण बेलवाल ने बताया कि पांडुकेश्वर, हनोल और जागेश्वर धाम सहित कई ऐतिहासिक मंदिरों की देखरेख एएसआई कर रहा है।
2013 की केदारनाथ आपदा के बाद मंदिर के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखना और बदरीनाथ मास्टर प्लान में संरचनात्मक संरक्षण एएसआई की बड़ी उपलब्धि रही है।

एपण कला से महिला सशक्तीकरण की नई इबारत 🎨

रामनगर की मीनाक्षी ने ‘माइंडकीर्ति’ के माध्यम से पारंपरिक एपण कला को न केवल संरक्षित किया, बल्कि इसे रोजगार से भी जोड़ा।
आज उनके साथ 15 महिलाएं काम कर रही हैं और एपण कला की मांग देश ही नहीं, विदेशों तक पहुंच चुकी है।

आपदा में देवदूत: एसडीआरएफ का शौर्य 🚑

एसडीआरएफ के स्टॉल ने आपदा प्रबंधन की सशक्त झलक दिखाई।
सब-इंस्पेक्टर अनूप रमोला के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक एसडीआरएफ ने 780 रेस्क्यू ऑपरेशन कर 22,013 लोगों की जान बचाई


सेल्फी प्वाइंट बना सबसे बड़ा आकर्षण 📸

प्रदर्शनी में उत्तराखंड के लोक जीवन को दर्शाता सेल्फी प्वाइंट सबसे अधिक चर्चा में रहा।
लकड़ी, पत्थर और स्लेट से बने पारंपरिक पहाड़ी घर, नक्काशीदार दरवाजे-खिड़कियां और दोमंजिला संरचना ने ‘अतिथि देवो भवः’ और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया।