अंबाला | 29 अक्टूबर 2025
भारत के रक्षा इतिहास में बुधवार का दिन स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हरियाणा के अंबाला वायुसेना स्टेशन से अत्याधुनिक राफेल लड़ाकू विमान में उड़ान भरकर एक नया कीर्तिमान रच दिया।
वे भारतीय वायुसेना के दो सबसे शक्तिशाली विमानों — सुखोई-30 एमकेआई (2023) और अब राफेल — में उड़ान भरने वाली देश की पहली राष्ट्रपति बन गईं।
🚀 आसमान में भारत की शक्ति का अहसास
करीब 30 मिनट तक चली इस उड़ान में राष्ट्रपति मुर्मु ने लगभग 200 किलोमीटर की दूरी तय की।
विमान को 17 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन अमित गेहानी ने उड़ाया। उड़ान के दौरान राफेल ने 15,000 फीट की ऊंचाई और लगभग 700 किमी/घंटा की रफ्तार हासिल की।
वापस लौटने के बाद राष्ट्रपति ने अपनी अनुभूति साझा करते हुए आगंतुक पुस्तिका में लिखा —
“राफेल पर यह पहली उड़ान मेरे जीवन का अविस्मरणीय अनुभव है। इस शक्तिशाली विमान में उड़ान ने मुझमें राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं के प्रति एक नई गर्व भावना भर दी है।”
उन्होंने भारतीय वायुसेना और अंबाला स्टेशन की पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं।
🇮🇳 राफेल: भारत के आसमान की नई ताकत
राफेल विमान फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित है और 2020 में पहली खेप अंबाला एयरबेस पर पहुँची थी। यह वही स्क्वाड्रन है, जिसने देश की वायु शक्ति को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
राफेल की गड़गड़ाहट अब सिर्फ धातु की नहीं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति की प्रतीक बन चुकी है।
💬 राष्ट्रपति की उड़ान, एक संदेश पूरे देश के लिए
यह उड़ान केवल एक औपचारिकता नहीं थी — यह संदेश था उस नए भारत का, जहाँ महिला नेतृत्व आत्मविश्वास के साथ रक्षा क्षेत्र में भी नई ऊँचाइयाँ छू रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मु की मुस्कान और साहस ने इस उड़ान को “सशक्त भारत” का प्रतीक बना दिया।










