यरूशलम | 25 फरवरी 2026 — प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इज़राइल की संसद नेसेट के विशेष पूर्ण अधिवेशन को संबोधित कर कूटनीतिक इतिहास में नया अध्याय जोड़ा। नेसेट को संबोधित करने वाले वे पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने।
सदन में उनका स्वागत नेसेट के अध्यक्ष अमीर ओहाना ने किया। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेन्जामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता यायर लापिद ने भी संबोधन से पहले वक्तव्य देकर भारत–इज़राइल संबंधों के प्रति व्यापक समर्थन दोहराया—यह संकेत था कि दोनों देशों की साझेदारी दलगत सीमाओं से परे है।
🎖️ लोकतांत्रिक मूल्यों पर जोर, “स्पीकर ऑफ द नेसेट” पदक से सम्मान
प्रधानमंत्री को “स्पीकर ऑफ द नेसेट” पदक से सम्मानित किया गया। अपने संबोधन में उन्होंने इसे दोनों देशों की स्थायी मित्रता और साझा लोकतांत्रिक परंपराओं को समर्पित बताया।
उन्होंने कहा कि भारत और इज़राइल के रिश्ते प्राचीन सभ्यतागत जुड़ाव और आधुनिक रणनीतिक सहयोग—दोनों की नींव पर खड़े हैं।
कृषि, जल प्रबंधन, रक्षा, नवाचार, स्टार्ट-अप और डिजिटल समाधान जैसे क्षेत्रों में सहयोग को उन्होंने “भविष्य की साझेदारी” का आधार बताया।
🔐 आतंकवाद पर शून्य सहिष्णुता, शांति के प्रयासों को समर्थन
प्रधानमंत्री ने 7 अक्तूबर के आतंकी हमले पर संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि आतंकवाद के लिए कोई औचित्य नहीं हो सकता। भारत और इज़राइल की “ज़ीरो टॉलरेंस” नीति को दोहराते हुए उन्होंने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए सभी रचनात्मक प्रयासों के प्रति समर्थन जताया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित गज़ा शांति पहल के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का भी उल्लेख किया गया।
🚀 IMEC, I2U2 और मुक्त व्यापार समझौते की ओर कदम
प्रधानमंत्री ने भारत–मध्य पूर्व–यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) और I2U2 ढांचे के तहत सहयोग को और गहरा करने का आह्वान किया।
उन्होंने व्यापार, निवेश, हरित विकास, अवसंरचना और उभरती प्रौद्योगिकियों में साझेदारी बढ़ाने पर बल दिया, ताकि युवाओं की नवाचार क्षमता को नई दिशा मिल सके।
द्विपक्षीय निवेश संधि के संपन्न होने पर संतोष जताते हुए उन्होंने एक महत्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द अंतिम रूप देने की अपील की।
🌍 साझा दर्शन: “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “तिक्कुन ओलाम”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दर्शन “वसुधैव कुटुम्बकम्” और इज़राइल का सिद्धांत “तिक्कुन ओलाम” — दोनों ही मानवता के कल्याण और सामंजस्यपूर्ण समाज की साझा दृष्टि को दर्शाते हैं।
संबोधन के अंत में उन्होंने आगामी ‘पुरिम’ पर्व की शुभकामनाएं दीं और नेसेट सदस्यों को भारत–इज़राइल संबंधों में योगदान के लिए धन्यवाद दिया।
यह भाषण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में बदलती साझेदारियों के बीच भारत और इज़राइल के रिश्तों को नई ऊर्जा देने वाला संदेश माना जा रहा है। 🎯









