🌼 मुख्यमंत्री धामी ने मनाया लोकपर्व फूलदेई, बच्चों के गीतों से गूंजा आंगन

देवभूमि उत्तराखंड में बसंत की आहट के साथ लोकसंस्कृति के रंग भी गहराने लगते हैं। पहाड़ों में खिलते फूलों की खुशबू और बच्चों की मधुर आवाज़ों के बीच शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई बड़े ही आत्मीय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने अपने परिवार के साथ इस लोकपरंपरा में भाग लिया और प्रदेशवासियों को पर्व की शुभकामनाएँ दीं। 🌸


देहरी पर फूल, गीतों में खुशहाली की कामना

मुख्यमंत्री आवास में जब पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चे देहरी पर फूल और चावल लेकर पहुँचे, तो वातावरण लोकगीतों की मधुर धुनों से गूंज उठा। बच्चों ने पहाड़ी लोकगीत फूल देई-छम्मा देई, जतुके दियाला-उतुके सई” गाकर घर-आंगन में सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

मुख्यमंत्री ने बच्चों का स्नेहपूर्वक स्वागत किया और उन्हें उपहार भेंट कर उनका उत्साह बढ़ाया। इस दौरान पूरे परिसर में लोकसंस्कृति की झलक साफ दिखाई दी।


प्रकृति के प्रति आभार का पर्व

मुख्यमंत्री ने कहा कि फूलदेई उत्तराखंड की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। बसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति की सुंदरता और जीवन में नई ऊर्जा का संदेश देता है।

उन्होंने कहा कि यह त्योहार हमें सिखाता है कि हमें प्रकृति के प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए, क्योंकि वही जीवन को संतुलन और समृद्धि प्रदान करती है। 🌿


लोकपरंपराओं को सहेजना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इन्हें संरक्षित करना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने पारंपरिक त्योहारों को पूरे उत्साह और गर्व के साथ मनाएँ, ताकि हमारी लोकसंस्कृति सदियों तक जीवंत बनी रहे।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री की पत्नी Geeta Pushkar Dhami भी मौजूद रहीं और बच्चों के साथ इस पारंपरिक उत्सव की खुशियाँ साझा कीं।


जड़ों से जुड़ने का संदेश देता है फूलदेई

फूलदेई पर्व बसंत के स्वागत के साथ-साथ प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और समाज में सुख-समृद्धि की कामना का संदेश देता है। यह त्योहार हमें अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इस सांस्कृतिक विरासत को समझ सकें और गर्व महसूस करें। 🌼