नेपाल में बीते कुछ दिनों से चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने हालात बेहद तनावपूर्ण बना दिए हैं। राजधानी काठमांडू से लेकर कई अन्य शहरों में फैली हिंसा को देखते हुए नेपाली सेना ने बुधवार शाम से पूरे देश में कर्फ्यू लागू करने का एलान किया है। फिलहाल यह कर्फ्यू गुरुवार सुबह तक प्रभावी रहेगा, लेकिन हालात की समीक्षा के बाद इसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
नेपाली सेना का कहना है कि आंदोलन की आड़ में कुछ असामाजिक तत्व निजी और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, आगज़नी कर रहे हैं और शारीरिक हिंसा की घटनाओं में शामिल हैं। हालात को काबू में रखने के लिए सेना को राजधानी के राष्ट्रपति भवन के बाहर भी तैनात किया गया है।
👉 प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर पुलिस और सेना के हथियार लूट लिए थे। इस पर सेना ने बयान जारी कर अपील की है कि जो भी लोग हथियार, गोला-बारूद या सुरक्षा उपकरण अपने पास रखे हुए हैं, वे तुरंत नज़दीकी सुरक्षा एजेंसियों को सौंप दें। सेना ने कहा कि “Gen-Z नेतृत्व वाले आंदोलन” को हिंसक मोड़ देने की कोशिशें बेहद ख़तरनाक हैं।
इस बीच नेपाल में हिंसा और आगज़नी की चपेट में नेताओं के घरों के साथ-साथ नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल जैसे राजनीतिक दलों के कार्यालयों को भी निशाना बनाया गया। हालात बिगड़ने से काठमांडू एयरपोर्ट बंद कर दिया गया है और इंडिगो एयरलाइंस ने अपनी सभी उड़ानें अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं। इसके चलते सैकड़ों भारतीय यात्री नेपाल में फँस गए हैं।
भारत सरकार ने भी हालात को गंभीर मानते हुए भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी है। केंद्रीय एजेंसियों ने अलर्ट जारी कर सीमा पर तैनात बलों और स्थानीय पुलिस को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि यह आंदोलन तब शुरू हुआ जब नेपाल सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स आदि) को स्थानीय पंजीकरण नियमों का पालन न करने के कारण ब्लॉक करने का विवादास्पद फैसला लिया था। इसी के बाद जनाक्रोश बढ़ता गया और मंगलवार को नेपाल के प्रधानमंत्री केपी ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नेपाल में हो रही हिंसा पर चिंता जताते हुए कहा कि यह बेहद दुखद है और सभी पक्षों से शांति और संयम बरतने की अपील की।









