उत्तराखंड के अंतिम छोर पर बसे देश के पहले गाँव माणा में जब ढोल-दमाऊं की थाप गूंजी, तो लगा मानो सीमांत की ठंडी हवाओं में भी देवभूमि की आत्मा झूम उठी हो। 🇮🇳
रविवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने “देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव 2025” के समापन समारोह में शिरकत की। दो दिनों तक चले इस आयोजन में संस्कृति, परंपरा, लोकगीत और देशभक्ति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला जिसने हर दिल को छू लिया।
यह भव्य आयोजन भारतीय सेना और उत्तराखंड सरकार के संयुक्त तत्वावधान में हुआ — एक ऐसा उदाहरण, जहाँ सीमांत की जनता, सेना और प्रशासन ने मिलकर सीमाओं को सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि संस्कृति और समृद्धि का भी प्रतीक बना दिया।
सीएम धामी ने महोत्सव की सफलता पर खुशी जताई और कहा —
“यह महोत्सव हमारे सीमांत गांवों की नई पहचान बना रहा है। वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम इन क्षेत्रों की आर्थिकी को नई उड़ान देगा और युवाओं व महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करेगा।”
उन्होंने “नो योर आर्मी” प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सेना के उपकरणों, मॉडल्स और सूचना सामग्री की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम नागरिक और सैनिकों के बीच भरोसे का रिश्ता और गहरा होगा।
🎶 लोक संस्कृति की झलक:
मंच पर जब स्कूली बच्चों ने गढ़वाली लोकनृत्य प्रस्तुत किया, तो तालियों की गड़गड़ाहट माणा की घाटियों में गूंज उठी। मुख्यमंत्री ने बच्चों को पुरस्कृत किया और कहा,
“गढ़वाली संस्कृति की ये झलकियाँ ही देवभूमि की असली पहचान हैं।”
स्थानीय कलाकारों, बैंड समूहों और शिल्पकारों ने पारंपरिक बुनाई, लकड़ी के हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और देसी व्यंजनों से सबका मन मोह लिया। पर्यटकों ने स्थानीय उत्पादों को खूब सराहा — जिससे सीमांत की अर्थव्यवस्था को भी नई ताकत मिली।
सीएम धामी ने कहा कि यह महोत्सव सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि “सर्दियों के पर्यटन, स्थानीय रोजगार और रिवर्स पलायन को गति देने वाला प्रयास” है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने श्री बद्रीविशाल के दर्शन कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि की कामना की। 🙏
इस मौके पर डीएम गौरव कुमार, एसपी सर्वेश पंवार, बीकेटीसी सीईओ विजय थपलियाल, जनप्रतिनिधि, सैन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।









