खटीमा की फिजाओं में इस बार सिर्फ गुलाल नहीं उड़ा, रिश्तों की गर्माहट भी घुली। सनातन धर्मशाला रामलीला मैदान में जब हजारों लोग होली मिलन समारोह में जुटे, तो मंच और मैदान के बीच की दूरी जैसे खत्म हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जब जनता के बीच पहुंचे, तो स्वागत में उठे हाथों और जयकारों ने माहौल को भावुक बना दिया।
🎶 जब मुख्यमंत्री ने थामी होली की तान
कार्यक्रम में कुमाऊँनी होली के पारंपरिक राग गूंजे, शास्त्रीय सुरों ने वातावरण को गरिमा दी और थारू समाज की लोकधुनों ने विविधता का रंग भर दिया। मुख्यमंत्री खुद भी इस सांस्कृतिक रंग में डूबे नजर आए। उन्होंने मंच से उतरकर लोकगायकों के साथ सुर मिलाए — यह दृश्य लोगों के लिए यादगार बन गया।
💬 “खटीमा मेरा घर, खटीमावासी मेरा परिवार”
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा,
“खटीमा मेरा घर है और यहां के लोग मेरा परिवार हैं।”
यह वाक्य सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आत्मीय जुड़ाव की झलक था। भीड़ ने तालियों से जवाब दिया।
उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, सौहार्द और समरसता का प्रतीक है। उत्तराखंड की लोकसंस्कृति हमारी पहचान है और ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं।
👩 महिला शक्ति को नमन, सामाजिक समरसता पर जोर
मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के बिना समाज प्रगति नहीं कर सकता। प्रदेश सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठा रही है।
उन्होंने खटीमा को ‘मिनी इंडिया’ बताते हुए कहा कि यहां सभी धर्मों और समुदायों के लोग मिल-जुलकर त्योहार मनाते हैं — यही इसकी असली ताकत है।
🤝 रंगों के साथ साझा हुआ विश्वास
समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने स्थानीय नागरिकों के साथ गुलाल लगाकर होली की खुशियां साझा कीं। मैदान में मौजूद बुजुर्गों से लेकर युवाओं और बच्चों तक, हर चेहरे पर उत्साह था।
खटीमा की इस होली ने यह संदेश दिया कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं — बस इरादा मजबूत होना चाहिए।










