‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ बना उत्तराखंड में सुशासन की सबसे मजबूत पहचान

उत्तराखंड में शासन अब फाइलों और दफ्तरों तक सीमित नहीं रहा। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार सचमुच जनता के द्वार तक पहुंची है—और यही वजह है कि ‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम आज राज्य में गुड गवर्नेंस का जीवंत उदाहरण बन चुका है।

पहाड़ की दुर्गम पगडंडियों से लेकर मैदानों के गांव-कस्बों तक, प्रशासन की सक्रिय मौजूदगी ने लाखों लोगों के मन में यह भरोसा जगाया है कि सरकार अब सुनती ही नहीं, समाधान भी करती है


📅 03 फरवरी 2026 तक के आंकड़े, जो सुशासन की कहानी कहते हैं

राज्य के सभी 13 जनपदों में इस अभियान के तहत अब तक 555 जनसुनवाई कैंप आयोजित किए जा चुके हैं।
इन कैंपों में 4,36,391 नागरिकों ने सीधे सहभागिता की—जहां उनकी समस्याएं सुनी भी गईं और बड़ी संख्या में सुलझाई भी गईं।

यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उन लोगों की उम्मीदें हैं जिन्हें वर्षों बाद लगा कि सरकार उनके साथ खड़ी है


📝 लाखों शिकायतें, त्वरित समाधान—कागज नहीं, काम दिखा

इन कैंपों में अब तक 43,032 शिकायतें और प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए।
सरकार की तत्परता का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि इनमें से 29,042 मामलों का निस्तारण पहले ही किया जा चुका है।

यह साफ संदेश है कि उत्तराखंड सरकार केवल जनसुनवाई तक सीमित नहीं, बल्कि जिम्मेदारी के साथ समाधान की गारंटी भी दे रही है।


🏡 सरकार आपके द्वार: प्रमाण पत्र से योजनाओं तक सीधी सुविधा

‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ अभियान के जरिए अब तक

  • 61,460 से अधिक प्रमाण पत्र और शासकीय सेवाएं मौके पर ही उपलब्ध कराई गईं

  • 2,39,766 नागरिकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिला

अब लोगों को तहसील, ब्लॉक या जिला कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे—सरकार खुद गांव पहुंच रही है


👩‍🦰 पहाड़ की महिलाओं के लिए बना उम्मीद का मंच

इस कार्यक्रम का सबसे मानवीय और प्रभावशाली पहलू है महिला सशक्तिकरण
दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों की महिलाएं, जिन्हें पहले एक प्रमाण पत्र के लिए भी मीलों चलना पड़ता था, आज अपने गांव में ही

  • पेंशन

  • राशन कार्ड

  • स्वास्थ्य सेवाएं

  • सामाजिक सुरक्षा योजनाएं

का लाभ पा रही हैं।
महिलाओं की शिकायतों का संवेदनशीलता और प्राथमिकता से समाधान हो रहा है, जिससे प्रशासन के प्रति विश्वास और सुरक्षा की भावना और मजबूत हुई है।


🗺️ हर जनपद में असरदार क्रियान्वयन

अल्मोड़ा से उत्तरकाशी तक, चमोली से हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर तक—
राज्य के हर जिले में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप समाधान दिए गए।
यह मुख्यमंत्री धामी की समस्या-केंद्रित शासन प्रणाली का स्पष्ट प्रमाण है, जहां नीति कागजों से निकलकर ज़मीन पर उतरती दिख रही है।


✅ सुशासन का भरोसेमंद मॉडल

‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ कार्यक्रम यह साबित करता है कि उत्तराखंड में—

  • सरकार जवाबदेह है

  • प्रशासन जनता के साथ खड़ा है

  • लोकतंत्र सिर्फ मतदान नहीं, सहभागिता है

यह पहल उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्तर पर गुड गवर्नेंस का आदर्श राज्य बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम बनकर उभरी है।


🗣️ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का स्पष्ट संदेश

“हमारी सरकार का संकल्प है कि शासन सचिवालय तक सीमित न रहे, बल्कि अंतिम व्यक्ति के द्वार तक पहुंचे।
‘जन-जन की सरकार, जन-जन द्वार’ इसी सोच का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं को गांव में ही सेवाएं देना हमारी गुड गवर्नेंस की प्राथमिकता है।

हम संवेदनशील, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के माध्यम से उत्तराखंड को सुशासन का आदर्श राज्य बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।”