हरिद्वार में शताब्दी ध्वज वंदन: साधना, संस्कार और सेवा का महासंकल्प, देवभूमि से उठा नवयुग का संदेश 🚩🕉️
राजा दक्ष की नगरी कनखल स्थित वैरागी द्वीप की पावन भूमि पर जब शताब्दी ध्वज आकाश में लहराया, तो ऐसा लगा मानो एक युग ने अपने गौरवशाली अतीत को नमन करते हुए भविष्य के लिए नया संकल्प लिया हो। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज के तत्वावधान में आयोजित गायत्री परिवार की संस्थापिका वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी एवं अखंड दीपक के शताब्दी समारोह का शुभारंभ ‘ध्वज वंदन समारोह’ के साथ श्रद्धा, साधना और भावनाओं के सागर में हुआ।
इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता की। यह आयोजन केवल एक समारोह नहीं, बल्कि भारतीय चेतना, संस्कृति और आत्मिक नवजागरण का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आया।
🌺 माता भगवती देवी शर्मा को राष्ट्र की कृतज्ञ श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह शताब्दी समारोह वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा के तपस्वी जीवन, निःस्वार्थ सेवा और अखंड साधना के प्रति राष्ट्र की भावनात्मक कृतज्ञता की सशक्त अभिव्यक्ति है। माताजी का संपूर्ण जीवन त्याग, बलिदान और साधना की वह ज्योति है, जिसने असंख्य जीवनों को दिशा और दृष्टि दी।
उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार किसी एक संगठन तक सीमित नहीं, बल्कि यह युग चेतना का वह प्रवाह है, जो व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र के उत्थान की प्रेरणा देता है।
🏔️ देवभूमि से उठता संस्कृति का नवजागरण
मुख्यमंत्री ने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत का स्मरण करते हुए कहा कि गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ और आदि कैलाश जैसे तीर्थ भारत की आत्मा की धड़कन हैं। ऐसे पावन परिवेश में आयोजित यह शताब्दी समारोह भारतीय संस्कृति, संस्कार और साधना परंपरा के नवजागरण का संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि के मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में समान नागरिक संहिता लागू करना, सख्त दंगारोधी और धर्मांतरण कानून लाना तथा 10 हजार एकड़ से अधिक अवैध अतिक्रमण हटाना सरकार के निर्णायक कदम हैं।
🌸 “सेवा, साधना और संस्कार से बनेगा नवयुग”
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि यह शताब्दी समारोह सेवा, साधना और संस्कार के त्रिवेणी संगम के रूप में नवयुग निर्माण की आधारशिला साबित होगा।
उन्होंने कहा कि विश्व की महान सभ्यताओं का निर्माण सामूहिक चरित्र निर्माण से ही संभव हुआ है। जब व्यक्ति नैतिक मूल्यों, अनुशासन और सेवा भाव को जीवन का आधार बनाता है, तभी सशक्त संस्कृति और स्थायी सभ्यता का जन्म होता है। जनशताब्दी समारोह इसी सामूहिक चेतना को जाग्रत करने का महत्त्वपूर्ण प्रयास है।
🔥 आत्मपरिवर्तन से समाज परिवर्तन का आह्वान
शताब्दी समारोह के दलनायक एवं देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि यह आयोजन किसी वैराग्यपूर्ण एकांत साधना का नहीं, बल्कि युगऋषि पूज्य आचार्यश्री का “खोया-पाया विभाग” है, जहां व्यक्ति स्वयं को और अपने दायित्व को पुनः खोजता है।
उन्होंने भावुक शब्दों में कहा—
“गंगा की कसम, यमुना की कसम, यह ताना-बाना बदलेगा।
कुछ हम बदलें, कुछ तुम बदलो, तभी यह ज़माना बदलेगा।”
डॉ. पण्ड्या ने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं बदलने का साहस करता है, तभी समाज और राष्ट्र के नवनिर्माण की नींव मजबूत होती है। शताब्दी समारोह का उद्देश्य भी इसी चेतना को जाग्रत करना है।
🤝 विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर पर्यटन मंत्री श्री सतपाल महाराज, राज्य मंत्री श्री विनय रुहेला, सुदर्शन न्यूज़ के प्रबंध निदेशक श्री सुरेश चव्हाण, ईडी के पूर्व निदेशक श्री राजेश्वर सिंह सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम में न्यायाधीश परविन्दर सिंह, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला, स्वामी सम्पूर्णानंद जी, स्वामी वेलु बापू जी, के. नारायण राव, रमेश भट्ट, दिनेश काण्डपाल, आचार्य डॉ. दयाशंकर विद्यालंकार सहित अनेक विभूतियों को शांतिकुंज का प्रतीक चिह्न, गंगाजली, रुद्राक्ष माला और युग साहित्य भेंट कर सम्मानित किया गया।
श्रद्धा और संकल्प से ओतप्रोत यह शताब्दी समारोह 23 जनवरी तक चलेगा और देवभूमि से संपूर्ण राष्ट्र को आत्मिक चेतना का संदेश देगा।










