हल्द्वानी, नैनीताल।
एमबी इंटर कॉलेज का मैदान बुधवार को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम का स्थल नहीं, बल्कि सहकारिता, महिला सशक्तिकरण और विकास की नई कहानी का गवाह बना। अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष–2025 के मौके पर आयोजित भव्य सहकारिता मेले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने न सिर्फ करोड़ों की सहायता बांटी, बल्कि प्रदेश के विकास की दिशा साफ करते हुए स्पष्ट संदेश दिया –
“उत्तराखंड का भविष्य सहकारिता, स्वदेशी और जनभागीदारी से ही मज़बूत होगा।”
17 करोड़ से ज्यादा की सीधी मदद, महिलाओं के हाथ में सशक्ति की चाबी 💰👩🌾
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री धामी ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और सहकारी समितियों को सशक्त बनाने के लिए बड़े वित्तीय पैकेज की घोषणा की और मंच से ही राशि वितरित की –
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दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता कल्याण योजना के तहत
👉 पशुपालन और सब्जी उत्पादन से जुड़ी महिलाओं के SHGs को 16.97 करोड़ रुपये की सहायता -
एनआरएलएम स्वयं सहायता समूहों के लिए
👉 75.50 लाख रुपये की वित्तीय सहायता
मेले में मौजूद हज़ारों महिलाओं के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी। जब सीएम धामी ने मंच से कहा कि –
“1 लाख 68 हजार से अधिक ‘लखपति दीदी’ आज उत्तराखंड की शक्ति हैं”
तो पूरा मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। यह सिर्फ घोषणा नहीं, महिलाओं की आर्थिक आज़ादी की जीती-जागती तस्वीर थी।
सहकारिता से पर्यटन तक: सात दिन का मेला, सैकड़ों सपनों का मंच 🏔️🧺
अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष और राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित इस सात दिवसीय सहकारिता मेले को सीएम धामी ने “स्थानीय अर्थव्यवस्था का इंजन” बताया।
मेले की खास बातें:
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थीम – “सहकारिता से पर्यटन विकास”
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मंच मिला –
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सहकारी समितियों
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स्वयं सहायता समूहों
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स्थानीय किसानों
को अपने हस्तशिल्प, कृषि, फल, स्थानीय व्यंजन और उत्पाद दिखाने और बेचने का मौका
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विशेष कार्यक्रमों में शामिल –
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ईको-आतिथ्य एवं ईको-टूरिज्म
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होमस्टे प्रबंधन
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स्थानीय व्यंजन
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कृषि एवं फल उत्पाद संवर्धन
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धामी ने कहा कि यह मेला सिर्फ खरीद–फरोख्त नहीं, बल्कि गांव-गांव की मेहनत को शहर तक लाने और युवाओं–महिलाओं को रोज़गार से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
सहकारिता में उत्तराखंड बना राष्ट्रीय मॉडल, 671 समितियाँ पूरी तरह डिजिटल 📲
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि “सहकारी समितियाँ अब सिर्फ कागज़ पर चलने वाली संस्था नहीं, बल्कि राज्य विकास की रीढ़ बन रही हैं।”
मुख्य बिंदु –
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पूरे देश में पहली बार सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण की शुरुआत उत्तराखंड से
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आज सभी 671 समितियाँ पूरी तरह डिजिटल प्रणाली से कार्यरत
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24 समितियाँ – जन औषधि केंद्र के रूप में
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640 समितियाँ – कॉमन सर्विस सेंटर के रूप में, जहाँ ग्रामीणों को मिलती हैं:
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बीमा सेवाएँ
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पेंशन
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आधार से जुड़ी सुविधाएँ
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अन्य डिजिटल सेवाएँ
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प्रदेश की 5511 समितियों में से 3838 समितियों का डेटा राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस पर अपलोड
👉 इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता तीनों में बढ़ोतरी
सीएम ने कहा,
“जब सहकारिता आधुनिक तकनीक से जुड़ेगी, तो पहाड़ों में भी विकास की रफ्तार शहरों जैसी होगी।”
PACS, डेयरी, मत्स्य समितियाँ – गांव की अर्थव्यवस्था को मिला सहकारिता का इंजन 🐟🐄🌾
फरवरी 2023 से अब तक राज्य सरकार ने –
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800 नई PACS (प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ)
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248 नई डेयरी समितियाँ
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116 मत्स्य समितियाँ
का गठन किया है।
मिलेट मिशन के तहत किसानों के लिए एक और बड़ा कदम –
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मंडुवा (कोदो) की खरीद दर इस वर्ष 48.86 रुपये प्रति किलो तय की गई
👉 इससे छोटे किसानों की आय में सीधी बढ़ोतरी
दीनदयाल उपाध्याय सहकारिता किसान कल्याण योजना के तहत –
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किसानों और SHGs को
👉 पशुपालन, दुग्ध व्यवसाय, मत्स्य पालन, फ्लोरीकल्चर आदि के लिए 5 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण -
सहकारी समितियों के माध्यम से
👉 1 लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त फसली ऋण
सहकारी बैंकिंग में 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक की जमापूंजी –
👉 यह आम जनता के भरोसे और सहकारिता की बढ़ती ताकत का संकेत है।
हल्द्वानी: सड़क, स्वास्थ्य, कनेक्टिविटी – एक साथ कई मोर्चों पर तेज़ विकास 🏗️🚉🚁
सीएम धामी ने हल्द्वानी–कुमाऊं क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का भी विस्तृत विवरण दिया।
मुख्य प्रोजेक्ट्स:
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792 करोड़ रुपये की रिंग रोड – ट्रैफिक से राहत, नई कनेक्टिविटी
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हल्द्वानी–लालकुआं बाईपास – आवागमन होगा आसान
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शहर में:
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योग एवं आयुष अस्पताल
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अंबेडकर पार्क
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ओपन जिम
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हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में राजकीय कैंसर संस्थान – इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता घटेगी
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नगर में:
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मल्टीस्टोरी पार्किंग
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वेस्ट मैनेजमेंट व लीगेसी वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट
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पोलिनेटर पार्क
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एस्ट्रो पार्क
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रेल और हवाई कनेक्टिविटी में बढ़त –
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हल्द्वानी से विभिन्न जिलों और मुंबई के लिए रेल सेवाओं को मज़बूती
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हेलीकॉप्टर सेवाओं की शुरुआत से चारधाम, पर्वतीय क्षेत्रों और प्रमुख शहरों के बीच दूरी मन-माफिक कम होगी
सीएम ने कहा,
“हल्द्वानी आज सिर्फ मंडी या गेटवे नहीं, बल्कि पूरे कुमाऊं के आधुनिक विकास का केंद्र बन रहा है।”
धर्मांतरण, लैंड जिहाद, भ्रष्टाचार पर सख्त संदेश – “ज़ीरो टॉलरेंस” 🚫
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कानून–व्यवस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक सुरक्षा पर भी साफ और सख्त संदेश दिया।
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प्रदेश में कठोर धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू
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लैंड जिहाद, लव जिहाद जैसी गतिविधियों पर कड़ी कार्रवाई
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10 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि अतिक्रमण से मुक्त
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250 अवैध मदरसे सील
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मदरसा बोर्ड समाप्त
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“ऑपरेशन कालनेमि” के ज़रिए
👉 सनातन संस्कृति के खिलाफ पाखंड फैलाने वालों पर कड़ी कार्रवाई -
देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून उत्तराखंड में लागू
👉 पिछले साढ़े चार साल में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी -
भ्रष्टाचार पर “ज़ीरो टॉलरेंस” पॉलिसी
👉 200 से अधिक भ्रष्टाचारी जेल में
धामी ने कहा,
“उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान, जनसांख्यिकीय संतुलन और युवाओं के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
(इस हिस्से में सरकार की नीति का उल्लेख जिम्मेदार और तथ्यात्मक अंदाज़ में रखा गया है, ताकि खबर संतुलित रहे।)
स्वदेशी से आत्मनिर्भर उत्तराखंड का संकल्प – “हर घर से उठनी चाहिए स्थानीय की आवाज़” 🧺🇮🇳
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वदेशी और स्थानीय उत्पादों के इस्तेमाल के आह्वान का समर्थन किया।
उन्होंने कहा –
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“उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाना है तो लोकल प्रोडक्ट्स को ग्लोबल पहचान देनी होगी।”
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प्रदेशवासियों से अपील –
👉 अपने इलाके, गांव, शहर में बने सामान को प्राथमिकता दें
👉 स्वदेशी के प्रयोग को जनआंदोलन का रूप दें
मंच पर सियासत नहीं, सहकारिता और समाज की साझी मौजूदगी
कार्यक्रम में राजनीतिक नेतृत्व से लेकर जमीनी स्तर के प्रतिनिधि तक बड़ी संख्या में मौजूद रहे –
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सांसद अजय भट्ट
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विधायक दीवान सिंह बिष्ट, राम सिंह कैड़ा
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दर्जाधारी मंत्री सुरेश भट्ट
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बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि
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स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएँ
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स्थानीय उत्पादक, किसान, युवा उद्यमी
हल्द्वानी का यह मेला एक संदेश देकर समाप्त हुआ –
“जब सरकार, सहकारिता और समाज एक साथ खड़े हों, तो विकास सिर्फ नारा नहीं, हकीकत बन जाता है।”









