जोहांसबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) – जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ की मुलाक़ात ने एक बार फिर दुनिया को साफ संकेत दे दिया है – भारत और ऑस्ट्रेलिया अब सिर्फ दोस्त नहीं, भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार हैं।
दोनों नेताओं की यह बैठक ऐसे समय पर हुई, जब हाल ही में भारत में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस पर ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने भारत के प्रति संवेदना और मज़बूत एकजुटता जताई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद किसी एक देश की नहीं, पूरी मानवता की चुनौती है।
आतंकवाद के ख़िलाफ़ साझा मोर्चा 🛡️
बैठक के दौरान दोनों प्रधानमंत्रियों ने दोबारा यह संकल्प दोहराया कि
-
आतंकवाद के लिए किसी भी तरह का समर्थन स्वीकार्य नहीं होगा,
-
वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के ख़िलाफ़ कठोर और समन्वित कार्रवाई की ज़रूरत है,
-
और भारत–ऑस्ट्रेलिया मिलकर इस लड़ाई को और सशक्त दिशा देंगे।
यह संदेश सिर्फ बयान नहीं, बल्कि उन ताकतों के लिए साफ चेतावनी है, जो शांति और स्थिरता को चुनौती देने की कोशिश करती हैं।
रणनीतिक साझेदारी: 2020 से अब तक और भी मज़बूत
साल 2020 में भारत–ऑस्ट्रेलिया संबंधों को वृहद रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) के स्तर तक ले जाया गया था। जोहांसबर्ग की इस मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने पिछले पाँच वर्षों में –
-
सुरक्षा और रक्षा सहयोग,
-
ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज (critical minerals),
-
उच्च प्रौद्योगिकी और इनोवेशन,
-
व्यापार एवं निवेश,
-
शिक्षा और स्किल-डेवलपमेंट,
-
और लोगों के बीच संपर्क (people-to-people ties)
जैसे क्षेत्रों में आई तेज़ प्रगति पर संतोष जताया।
दोनों पक्षों ने माना कि बीते वर्षों में लगातार बढ़ते उच्च-स्तरीय संपर्कों – जैसे शिखर वार्ताएं, मंत्रिस्तरीय संवाद और रक्षा संबंधी बातचीत – ने रिश्तों को धरातल पर मजबूत और परिणाम-केंद्रित बनाया है।
इंडो-पैसिफिक से ग्लोबल मुद्दों तक – साझा सोच, साझा दिशा 🌏
इस मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने सिर्फ द्विपक्षीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि
-
क्षेत्रीय सुरक्षा,
-
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन और स्थिरता,
-
वैश्विक अर्थव्यवस्था,
-
जलवायु परिवर्तन,
-
और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था
जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी गहन चर्चा की।
भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों ने यह स्पष्ट किया कि एक मजबूत, सुरक्षित और स्थिर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र दोनों देशों के साझा हित में है।
रिश्ता सिर्फ कूटनीति नहीं, लोगों के दिलों तक पहुंचा है 🤝
बैठक में शिक्षा, कौशल विकास और विद्यार्थियों व पेशेवरों की मोबिलिटी पर भी बात हुई। ऑस्ट्रेलिया में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्र, काम कर रहे प्रोफेशनल्स और दोनों देशों के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संपर्क ने इस रिश्ते को ज़मीन से जुड़ा और मानवीय आयाम दिया है।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि
-
लोगों के बीच संपर्क,
-
युवाओं के स्तर पर सहयोग,
-
और ज्ञान–विज्ञान के क्षेत्र में साझेदारी
रिश्तों को आने वाले दशकों के लिए और मजबूत आधार देगी।
भविष्य की दिशा: रिश्तों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का संकल्प 🚀
मुलाक़ात के अंत में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री अल्बनीज़ ने दोहराया कि वे भारत–ऑस्ट्रेलिया वृहद रणनीतिक साझेदारी को आने वाले समय में और भी ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यह मुलाक़ात सिर्फ औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि एक स्पष्ट संदेश बनकर उभरी –
भारत और ऑस्ट्रेलिया, दोनों लोकतांत्रिक देश, एक-दूसरे के भरोसेमंद साझेदार हैं
जो सुरक्षा, विकास और स्थिरता के साझा लक्ष्य के लिए कंधे से कंधा मिलाकर काम करेंगे।









