देहरादून, शुक्रवार।
राज्य सचिवालय का माहौल शुक्रवार को अलग ही भावनाओं से भरा नज़र आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित राज्य दिव्यांग सलाहकार बोर्ड की बैठक में जब दिव्यांगजनों के अधिकारों और सम्मान की बात उठी, तो संदेश साफ था – “यह केवल सरकारी औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी है।”
मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को सख़्त निर्देश दिए कि दिव्यांग भाई-बहनों के लिए चल रही सभी योजनाओं का लाभ उन्हें सरलता और पारदर्शिता के साथ मिले। उन्होंने कहा कि समाज के इस वर्ग की समस्याओं का समाधान शासन-प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
🎯 स्वास्थ्य शिविरों पर विशेष जोर
सीएम धामी ने स्वास्थ्य सचिव को निर्देश दिए कि समय-समय पर प्रदेशभर में विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं। इन शिविरों में न केवल इलाज और प्रमाण-पत्र उपलब्ध हों, बल्कि मौके पर ही कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण भी दिए जाएं।
🎯 रोज़गार और पेंशन योजनाओं पर ध्यान
समाज कल्याण विभाग को निर्देशित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी सेवाओं की नियुक्तियों में दिव्यांगजनों को आरक्षण का पूरा लाभ मिलना चाहिए। साथ ही, पेंशन और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में यह सुनिश्चित हो कि पात्र लाभार्थियों को शत-प्रतिशत लाभ समय पर पहुंचे।
🎯 सरकार की प्रतिबद्धता
सीएम धामी ने कहा – “दिव्यांगजन समाज का अभिन्न अंग हैं। उन्हें सक्षम बनाने के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। उनके मुद्दों पर विभागीय स्तर पर सतत अनुश्रवण हो और योजनाओं का क्रियान्वयन ज़मीन पर दिखे।”
बैठक में विधायक भरत चौधरी, सविता कपूर समेत समाज कल्याण और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विधायकों और बोर्ड सदस्यों ने कई सुझाव दिए, जिन पर मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख अपनाने की बात कही।
अंत में सीएम धामी ने भावुक होते हुए कहा – “दिव्यांगजनों की समस्याएँ किसी सरकार के लिए महज़ प्रशासनिक विषय नहीं हैं, बल्कि मानवीय सरोकार से जुड़ी जिम्मेदारी भी हैं। और इस जिम्मेदारी को निभाने में उत्तराखंड सरकार पूरी ईमानदारी से काम कर रही है।”










