खटीमा की धरती सोमवार को फिर से शहादत और बलिदान की यादों से गूंज उठी। उत्तराखंड आंदोलन के दौरान शहीद हुए वीर सपूतों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शहीदों को नमन किया। इस मौके पर उन्होंने आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सम्मानित किया और कहा कि खटीमा गोलीकांड केवल एक घटना नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की आत्मा है जिसने राज्य निर्माण की चिंगारी को प्रज्वलित किया।
मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा – “आज का दिन हमें भगवान सिंह सिरौला, प्रताप सिंह, रामपाल, सलीम अहमद, गोपीचंद, धर्मानंद भट्ट और परमजीत सिंह जैसे अमर बलिदानियों को याद दिलाता है। उत्तराखंड का हर नागरिक इन सपूतों का सदैव ऋणी रहेगा। उनके सपनों का उत्तराखंड बनाना ही हमारी सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी।”
🎯 राज्य आंदोलनकारियों के सम्मान में उठाए कदम
सीएम धामी ने बताया कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों की कुर्बानियों को भूली नहीं है। उनके आदर्शों को साकार करने के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं:
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सरकारी नौकरियों में राज्य आंदोलनकारियों और आश्रितों को 10% क्षैतिज आरक्षण।
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शहीद परिवारों को ₹3,000 मासिक पेंशन।
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घायल/जेल गए आंदोलनकारियों को ₹6,000 और सक्रिय आंदोलनकारियों को ₹4,500 मासिक पेंशन।
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चिह्नित आंदोलनकारियों की विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा पुत्रियों को भी आरक्षण का लाभ।
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93 आंदोलनकारियों को राजकीय सेवा में नियुक्ति।
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सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा सुविधा।
🌸 नारी शक्ति की भूमिका पर विशेष जोर
सीएम धामी ने आंदोलन में महिलाओं की अहम भागीदारी को याद करते हुए कहा कि मातृशक्ति के योगदान को सम्मान देने के लिए ही महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30% आरक्षण दिया गया है।
⚖️ ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की। साथ ही नकल-विरोधी कानून ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का रास्ता आसान किया और 24 हज़ार से अधिक युवा सफल हुए।
🌍 हिमालय बचाने की शपथ
सीएम धामी ने कहा कि देवभूमि की डेमोग्राफी और पर्यावरण की रक्षा सरकार की प्राथमिकता है। धर्मांतरण विरोधी और दंगा विरोधी कानून लागू किए गए, 7 हज़ार एकड़ भूमि अतिक्रमण से मुक्त कराई गई। इस मौके पर उन्होंने जनता को “हिमालय बचाओ अभियान” की शपथ भी दिलाई।
इस कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, विधायक भुवन कापड़ी, नगर पालिका अध्यक्ष रमेश चंद जोशी समेत बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, राज्य आंदोलनकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।









