🔸 खटीमा | 6 जुलाई 2025
जहाँ नेता अक्सर मंचों से किसानों की बात करते हैं, वहीं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को खटीमा के नगरा तराई क्षेत्र में अपने ही खेत में धान रोपकर यह साबित कर दिया कि वह धरती से जुड़े हैं — शब्दों में नहीं, कर्मों में।
मुख्यमंत्री ने गीली मिट्टी में नंगे पांव उतरकर जिस आत्मीयता से धान की रोपाई की, उसने न सिर्फ किसानों का हौसला बढ़ाया बल्कि पूरे क्षेत्र में संवेदनाओं की फसल भी लहलहा उठी।
🗣️ “ये मिट्टी सिर्फ फसल नहीं देती, ये हमें जोड़ती है हमारी जड़ों से। खेत में उतरकर पुराने दिन ताज़ा हो गए,” सीएम धामी ने मुस्कुराते हुए कहा।
🌾 अन्नदाता को दिया मान – देवताओं का किया वंदन
इस मौके पर उन्होंने उत्तराखंड की समृद्ध लोकधारा ‘हुड़किया बौल’ के माध्यम से भूमियां देवता, इंद्र देव और मेघ देव का आह्वान कर भूमि, जल और छाया की पवित्रता को नमन किया।
🎶 पारंपरिक भक्ति गीतों और लोकसंगीत की छांव में सीएम धामी ने खेती को केवल आजीविका नहीं, एक आध्यात्मिक साधना बताया।
👨🌾 “किसान सिर्फ अनाज नहीं उगाता, वो संस्कृति बोता है, सभ्यता सींचता है और परंपराओं की फसल काटता है,” उन्होंने कहा।
🙏 गांव, संस्कृति और मुख्यमंत्री – एक दिल से दिल का रिश्ता
सीएम धामी की यह पहल सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि उत्तराखंड की मिट्टी, संस्कृति और किसानों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की गहरी झलक थी। उनका यह कदम लोगों के दिलों में सीधा उतर गया —
🌿 किसान बोले – “आज लगा जैसे हमारी मेहनत को सच में कोई समझता है।”
📸 खेतों की मेड़ पर खड़े बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग मंत्रमुग्ध होकर इस दृश्य को देख रहे थे – मानो राज्य और गांवों के बीच की खाई मिटती जा रही हो।










