शेफ संवाद से निकला उत्तराखंड के स्वाद का भविष्य, मुख्यमंत्री धामी का आह्वान – अब पहाड़ की थाली जाएगी ग्लोबल मंच तक 🍲🌍
देवभूमि उत्तराखंड के पारंपरिक स्वाद अब सिर्फ पहाड़ों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि दुनिया की थाली तक पहुंचेंगे। यही संदेश मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने श्रीअन्न आधारित “शेफ संवाद” कार्यक्रम में दिया। आम्रपाली विश्वविद्यालय परिसर से आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आवास से वर्चुअल माध्यम से सहभागिता करते हुए शेफ समुदाय, पर्यटन विशेषज्ञों और युवाओं से सीधा संवाद किया।
कार्यक्रम में देशभर से जुड़े युवा शेफ, होटल और पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ, शिक्षाविद् और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संवाद का केंद्र रहा उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजन, श्रीअन्न आधारित खानपान, रोजगार के अवसर और स्थानीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने की रणनीति।
🍛 हर होटल की थाली में उत्तराखंड का स्वाद
युवा शेफों के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने सभी होटलों के मेन्यू में पारंपरिक उत्तराखंडी व्यंजन शामिल करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री आवास और सरकारी आयोजनों में भी मेहमानों को प्राथमिकता से स्थानीय भोजन परोसा जा रहा है, ताकि पहाड़ के स्वाद को सम्मान और पहचान मिल सके।
🤝 शेफों के लिए बनेगा साझा मंच
शेफ संजीव जुयाल के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के सभी शेफों को एक साझा मंच पर लाने के लिए पर्यटन विभाग को समग्र प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए जाएंगे। इस “अंब्रेला प्लेटफॉर्म” के जरिए राज्य के शेफों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर मिलेंगे और उत्तराखंड की ब्रांड वैल्यू मजबूत होगी।
🥣 पारंपरिक व्यंजनों की शुद्धता और पहचान पर जोर
शेफ सुनील उपाध्याय द्वारा उठाए गए शुद्धता और मानकीकरण के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारंपरिक व्यंजनों की मौलिकता बनाए रखने के लिए गंभीरता से काम कर रही है। उत्तराखंड के व्यंजनों की गुणवत्ता, प्रमाणिकता और मानक तय किए जा रहे हैं, ताकि असली पहाड़ी स्वाद कभी खो न जाए।
🚀 युवाओं के लिए फूड स्टार्टअप और पर्यटन में नए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन और कौशल विकास विभाग मिलकर युवाओं को फूड स्टार्टअप, हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन से जोड़ने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रहे हैं। लक्ष्य है कि युवा स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर स्वरोजगार और उद्यमिता की ओर बढ़ें।
🏔️ स्वाद में बसती है उत्तराखंड की आत्मा
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि यह संवाद केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की संस्कृति, परंपरा और पहचान से जुड़ा हुआ है। पहाड़ों के व्यंजन यहां की जीवनशैली, संघर्ष और संस्कारों की कहानी कहते हैं। आज का पर्यटक सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य नहीं, बल्कि स्थानीय खानपान और संस्कृति का अनुभव भी चाहता है।
उन्होंने कहा कि आज का शेफ केवल रसोई तक सीमित नहीं, बल्कि वह संस्कृति का संवाहक, पर्यटन का ब्रांड एम्बेसडर और रोजगार सृजन का मजबूत माध्यम बन चुका है।
🌾 श्रीअन्न बना विकास का मजबूत आधार
श्रीअन्न पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मंडुवा, झंगोरा, कोदा और रामदाना जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली, पोषक तत्वों से भरपूर और किसानों की आय बढ़ाने वाली हैं। यह केवल भोजन नहीं, बल्कि गांव, किसान और समाज के अंतिम व्यक्ति को विकास से जोड़ने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत श्रीअन्न के क्षेत्र में विश्व का मार्गदर्शन कर रहा है और वैश्विक उत्पादन में लगभग 38.4 प्रतिशत योगदान देता है।
🧑🍳 नौकरी मांगने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बने युवा
पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में लगभग 44 प्रतिशत युवा उत्तराखंड वापस लौटे हैं। यह राज्य में बढ़ते अवसरों और बदलते भविष्य का संकेत है। सरकार का स्पष्ट विजन है कि उत्तराखंड का युवा अब नौकरी मांगने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बने।
कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने शेफ समुदाय से अपील की कि वे मिलकर उत्तराखंड के पारंपरिक व्यंजनों को “लोकल से ग्लोबल” बनाने का संकल्प लें। उन्होंने विश्वास जताया कि “शेफ संवाद” से निकले विचार उत्तराखंड को पर्यटन, रोजगार और संस्कृति के क्षेत्र में नई पहचान देंगे।
इस अवसर पर विधायक श्री बंशीधर भगत, आम्रपाली विश्वविद्यालय से श्री संजय मिश्रा सहित देशभर से आए अनेक प्रतिष्ठित शेफ उपस्थित रहे।










