देहरादून की फिज़ा मंगलवार को बेहद भावुक और संवेदनशील रही। उत्तराखंड की राजनीति और समाज को झकझोर देने वाले अंकिता भंडारी प्रकरण में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने एक अहम और बड़ा फैसला लेते हुए CBI जांच की संस्तुति दे दी है। यह निर्णय स्वर्गीय अंकिता के माता–पिता के अनुरोध और उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए लिया गया है। 🎯
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि सरकार की प्राथमिकता शुरू से अंत तक निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रही है और आगे भी यही संकल्प रहेगा।
🕯️ “अंकिता सिर्फ एक पीड़िता नहीं, हमारी बहन-बेटी थी”
मुख्यमंत्री धामी ने भावुक होते हुए कहा—
“अंकिता केवल एक केस नहीं थी, वह हमारी भी बहन और बेटी थी।”
उन्होंने कहा कि इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलते ही राज्य सरकार ने बिना किसी देरी के कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई की।
⚖️ SIT से लेकर आजीवन कारावास तक
मुख्यमंत्री ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल महिला IPS अधिकारी के नेतृत्व में SIT गठित की गई।
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सभी अभियुक्तों को शीघ्र गिरफ्तार किया गया
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सरकार की ओर से मजबूत पैरवी की गई
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किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल पाई
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गहन विवेचना के बाद चार्जशीट दाखिल की गई
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निचली अदालत द्वारा दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई
मुख्यमंत्री ने इसे इस बात का प्रमाण बताया कि सरकार ने पूरे प्रकरण में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती।
🔍 सोशल मीडिया ऑडियो क्लिप्स पर भी सख़्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने बताया कि हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर वायरल कुछ ऑडियो क्लिप्स के मामले में भी अलग–अलग FIR दर्ज की गई हैं और उनकी जांच लगातार जारी है।
उन्होंने दो टूक कहा—
“किसी भी तथ्य, साक्ष्य या संकेत को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाएगा।”
🤝 माता–पिता से मुलाकात के बाद बड़ा फैसला
मुख्यमंत्री धामी ने जानकारी दी कि हाल ही में उन्होंने स्वर्गीय अंकिता भंडारी के माता–पिता से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने मामले की CBI जांच कराने का आग्रह किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माता–पिता की पीड़ा, उनके विश्वास और भावनाओं का सम्मान करते हुए राज्य सरकार ने CBI जांच का निर्णय लिया है।
🔒 “न्याय के लिए सरकार पूरी मजबूती से खड़ी है”
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि उत्तराखंड सरकार पहले भी न्याय के लिए प्रतिबद्ध थी और आगे भी पूरी दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ स्वर्गीय अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए खड़ी रहेगी।
यह फैसला न केवल एक परिवार के दर्द को समझने का संदेश है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जनभावनाओं और न्याय के बीच सरकार कोई समझौता नहीं करेगी।










