देहरादून | 22 अक्टूबर 2026
📢 उत्तराखंड में विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए लोक निर्माण विभाग ने विभागीय समन्वय, नियमों की स्पष्ट समझ और समयबद्ध कार्रवाई पर जोर दिया है। सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने अधिकारियों को लंबित मामलों का व्यावहारिक समाधान निकालने और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने के निर्देश दिए।
सचिवालय में हुई बैठक में भूमि अधिग्रहण, वन भूमि हस्तांतरण, यूटिलिटी शिफ्टिंग, भूमि नामांतरण और विभिन्न पोर्टल से जुड़ी प्रक्रियाओं सहित विकास कार्यों में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गई।
विकास कार्यों की बाधाओं पर हुआ मंथन
लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में राज्य-विशिष्ट प्रारूप टिप्पणी (State-Specific Draft Note) को अंतिम रूप देने के लिए बैठक आयोजित की गई।
इस दौरान अवधारणा-पत्र (Concept Note) और विभिन्न हितधारक विभागों से प्राप्त सुझावों पर विचार किया गया। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से राज्य में विकास परियोजनाओं को लागू करने के दौरान सामने आ रही समस्याओं और उनके संभावित समाधानों पर चर्चा हुई।
भूमि अधिग्रहण से लेकर यूटिलिटी शिफ्टिंग तक के मुद्दे उठे
बैठक में विकास परियोजनाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की गई। इनमें पीएम गतिशक्ति पोर्टल, भूमि राशि पोर्टल, परिवेश पोर्टल, भूमि अधिग्रहण और भूमि पर कब्जे के हस्तांतरण से संबंधित मामले शामिल रहे।
इसके अलावा वन भूमि हस्तांतरण, राइट ऑफ वे (RoW) से बाहर स्थित संपत्तियों को नुकसान होने पर मुआवजा, यूटिलिटी शिफ्टिंग, लैंड बैंक, म्यूटेशन यानी भूमि नामांतरण और रॉयल्टी से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
ठेकेदारों की ओर से सिंगल विंडो व्यवस्था के तहत प्रस्तुत आवेदनों पर निर्धारित समय में अनुमति देने की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने के सुझाव भी रखे गए।
हर मामले की विस्तृत कार्ययोजना बनाने पर जोर
सचिव डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय ने कहा कि विकास कार्यों से जुड़ी समस्याओं का समाधान निकालने के लिए संबंधित यूजर एजेंसियों को दस्तावेजीकरण पर विशेष ध्यान देना होगा। प्रत्येक प्रकरण की विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने और उससे जुड़े नियमों व प्रक्रियाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की जरूरत है।
उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, संबंधित नियमों, मूल कानून और भारत सरकार के दिशा-निर्देशों को अच्छी तरह समझने पर जोर दिया। उनके अनुसार, नियमों की स्पष्ट जानकारी से मामलों का सही आकलन करने और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप समाधान तलाशने में मदद मिलेगी।
स्थानीय लोगों से संवाद कर तलाशें समाधान
बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि विकास परियोजनाओं से जुड़ी समस्याओं को केवल चिह्नित करने तक सीमित न रहें, बल्कि उनके व्यावहारिक और नियमसम्मत समाधान भी प्रस्तुत करें।
संबंधित विभागों और यूजर एजेंसियों को अपने स्तर पर प्रभावी पहल करने के साथ स्थानीय लोगों से संवाद स्थापित करने को कहा गया, ताकि उनकी समस्याओं और परिस्थितियों को समझकर उचित समाधान निकाला जा सके।
सचिव ने यह भी कहा कि जिन मामलों में नियमों या प्रक्रियाओं में संशोधन की आवश्यकता है, उन्हें स्पष्ट रूप से चिह्नित कर उचित प्रस्ताव तैयार किए जाएं।
अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान
विकास परियोजनाओं से जुड़ी प्रक्रियाओं और उनके प्रभावों की सही जानकारी को प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जरूरी बताया गया। सचिव ने निर्देश दिए कि जिन विभागों और यूजर एजेंसियों के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रशिक्षण की जरूरत है, उनके लिए आवश्यक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।
उन्होंने विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने, तकनीकी और प्रक्रियागत पहलुओं को समझने तथा लंबित मामलों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में आयुक्त एवं सचिव, राजस्व परिषद श्रीमती रंजना राजगुरु, अपर सचिव श्री विनीत कुमार, सेतु आयोग के सलाहकार श्री विशाल पाराशर, लोक निर्माण विभाग के अधीक्षण अभियंता श्री मनोज कुमार बिष्ट, यूपीसीएल के अधीक्षण अभियंता श्री अरुण कांत, पिटकुल के अधीक्षण अभियंता श्री राकेश कुमार और यूजेवीएनएल के डीजीएम श्री मुकेश वर्मा सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त, सभी जनपदों के जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल हुए।











