देहरादून | 22 अक्टूबर 2026
🏔️ उत्तराखंड की लोकभाषाओं को डिजिटल दुनिया में नई पहचान दिलाने की दिशा में पहल शुरू हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार के लिए ‘भाषा AI’ वॉइस कलेक्शन पोर्टल का शुभारंभ किया। इस अभियान की शुरुआत मुख्यमंत्री की कुमाऊँनी भाषा में रिकॉर्ड की गई वॉइस क्लिप से हुई। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रीय भाषाओं के शब्दों, उच्चारण और बोलने के अलग-अलग अंदाज को AI तकनीक से जोड़ना है।
📢 लोकभाषाओं को तकनीक से जोड़ने की पहल
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में एआई स्ट्रैटेजिक इंजीनियरिंग (AiSE) फाउंडेशन की ओर से विकसित पोर्टल का उद्घाटन किया। यह पहल ‘भाषा AI’ अभियान के अंतर्गत शुरू की गई है।
इस पोर्टल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं के शब्दों और आवाजों का संग्रह तैयार किया जा रहा है, ताकि भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीक इन भाषाओं को बेहतर तरीके से समझ सके और इनके माध्यम से संवाद कर सके।
🗣️ ‘हमारी बोली-भाषाएं हमारी पहचान’
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोकभाषाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। लोककला, परंपराओं और भाषाई विरासत को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय भाषाओं को भी इस तकनीक के अनुकूल विकसित करना आवश्यक है, ताकि उत्तराखंड की भाषाई विरासत को व्यापक और वैश्विक पहचान मिल सके।
📱 गांवों के लोगों को अपनी भाषा में मिल सकेगी जानकारी
मुख्यमंत्री ने इस पहल को स्थानीय लोगों और सरकारी योजनाओं के बीच भाषा की बाधा कम करने के प्रयास से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि दूरदराज के गांवों में रहने वाले लोग अपनी बोली में सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकें और अपनी बात आसानी से सरकार तक पहुंचा सकें।
इसके लिए AI का स्थानीय भाषाओं को सही ढंग से समझना जरूरी है। शब्दों के संग्रह के साथ उनके सही उच्चारण और बोलने की शैली को भी तकनीक से जोड़ना होगा, ताकि लोगों को उनकी भाषा में सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा सके।
🎙️ एक ही शब्द के अलग-अलग उच्चारण भी होंगे दर्ज
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के अलग-अलग क्षेत्रों में कई शब्दों के उच्चारण और बोलने के तरीके में अंतर देखने को मिलता है।
वॉइस कलेक्शन पोर्टल पर जानकारी अपलोड होने से AI को इन क्षेत्रीय विविधताओं को समझने में मदद मिलेगी। इससे गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं की मौलिकता तथा स्थानीय बोलियों की विशेषताओं को डिजिटल रूप में सहेजने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों को अपनी भाषा, लोककला, संस्कृति और परंपराओं से जोड़े रखने में भी उपयोगी साबित होगी।
🎶 प्रीतम भरतवाण बोले- लोकभाषाओं में समृद्ध सांस्कृतिक विरासत
कार्यक्रम में पद्मश्री लोकगायक प्रीतम भरतवाण ने कहा कि उत्तराखंड की लोकभाषाओं में लोकजीवन, लोकगीत, जागर और सांस्कृतिक परंपराओं की समृद्ध विरासत समाहित है।
उन्होंने बताया कि जागर अकादमी इस पहल में स्थानीय भाषाओं के सही उच्चारण और उनकी मौलिकता को बनाए रखने के लिए सहयोग करेगी।
🤖 भविष्य में स्थानीय भाषाओं में संवाद कर सकेगा AI
AiSE फाउंडेशन के संस्थापक सचिदानंद सेमवाल ने बताया कि ‘भाषा AI’ पहल के तहत गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं के शब्दों और आवाजों का संग्रह तैयार किया जा रहा है।
इसका उद्देश्य भविष्य में AI आधारित तकनीक को इन भाषाओं में संवाद करने में सक्षम बनाना है। पोर्टल के माध्यम से जुटाई जाने वाली भाषाई सामग्री इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर शक्ति प्रसाद भट्ट, गजेंद्र नौटियाल, अनिरुद्ध रैथवान, निधि सेमवाल, अनिल गोदियाल, डॉ. जे.के. पांडे और देव रतूड़ी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।










