पेरिस | 20 अक्टूबर 2026
🇫🇷 फ्रांस में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं की स्थिति को लेकर शुरू हुए विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए। पेरिस समेत कई शहरों में दुकानों में लूटपाट, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाएं सामने आई हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कुछ इलाकों में रात के समय कर्फ्यू लगाया है और प्रदर्शनों पर भी पाबंदियां लागू की हैं।
पेरिस में रात के समय प्रतिबंध
पेरिस पुलिस ने सोमवार रात 11 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे तक राजधानी के दो इलाकों—प्लेस डे ला रिपब्लिक और लेस हॉल्स—में कर्फ्यू लागू किया। इसके अलावा, रात 8 बजे से प्रदर्शनों और लोगों के एकत्र होने पर भी रोक लगाई गई।
फ्रांस के कुछ अन्य शहरों में भी सुरक्षा उपाय बढ़ाए गए हैं। स्थानीय प्रशासन हालात के अनुसार प्रतिबंधों को दोबारा लागू करने पर फैसला ले सकता है।
महंगाई और शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन
17 अक्टूबर को फ्रांस के कई शहरों में बड़े पैमाने पर मार्च निकाले गए। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख चिंताओं में बढ़ती जीवन-यापन लागत और स्कूलों की खराब स्थिति शामिल थीं।
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, प्रदर्शनों में करीब 5.5 लाख लोग शामिल हुए, जबकि आयोजकों ने यह संख्या लगभग 8 लाख बताई। अधिकतर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे, लेकिन कुछ जगहों पर हिंसक समूहों ने दुकानों और सार्वजनिक इमारतों को निशाना बनाया।
2,400 से अधिक गिरफ्तारियां, संपत्तियों को नुकसान
हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद देशभर में 2,400 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किए जाने की खबर है। करीब 3,000 कारोबारी प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने या लूटपाट का शिकार होने का अनुमान भी सामने आया है।
लिमोज शहर के ऐतिहासिक नगर भवन में आग लगने की घटना के अलावा मार्सेई और लियोन में भी सार्वजनिक इमारतों को नुकसान पहुंचा। पुलिस और प्रशासन अब हालात सामान्य करने तथा हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई पर ध्यान दे रहे हैं।
मैक्रों ने हिंसा की निंदा की
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने तोड़फोड़ और लूटपाट की निंदा करते हुए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की बात कही है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में संभावित चूकों की समीक्षा करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने के निर्देश भी दिए।
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने हिंसा के बाद इस्तीफे की पेशकश की थी, लेकिन मैक्रों ने इसे स्वीकार नहीं किया। सरकार के सामने अब सार्वजनिक व्यवस्था बहाल करने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की शिकायतों पर बातचीत करने की चुनौती है।










