देहरादून | 14 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विश्व हिंदू परिषद की ओर से आयोजित श्रद्धेय अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। पटेलनगर स्थित राजकीय दून मेडिकल कॉलेज ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने अशोक सिंघल के जीवन और राष्ट्रसेवा में उनके योगदान को याद किया। इस दौरान उन्होंने पत्रिका ‘विश्व हिंदू’ के अशोक सिंघल पर प्रकाशित विशेषांक का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ने में अशोक सिंघल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उन्होंने उत्तराखंड की धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक मूल्यों और तीर्थस्थलों के विकास के लिए राज्य सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
🇮🇳 राष्ट्रसेवा और संस्कृति के प्रति समर्पण को किया याद
मुख्यमंत्री धामी ने अशोक सिंघल को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्रहित, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और समाज को संगठित करने के लिए समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि सादगी, सेवाभाव और अपने दायित्वों के प्रति निष्ठा उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं थीं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, अशोक सिंघल के विचार आने वाली पीढ़ियों को समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने की प्रेरणा देते रहेंगे।
🛕 राम जन्मभूमि आंदोलन में भूमिका का उल्लेख
सीएम धामी ने कहा कि वर्ष 1984 में दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पहली धर्म संसद से लेकर राम जन्मभूमि आंदोलन को देशव्यापी स्वरूप देने तक अशोक सिंघल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में जाकर संतों, धर्माचार्यों और समाज के अलग-अलग वर्गों को आंदोलन से जोड़ने का प्रयास किया।
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम के आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि मर्यादा, सेवा, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा जैसे मूल्यों को अपनाकर समाज को मजबूत बनाया जा सकता है। उन्होंने अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण को देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ी महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
⚖️ UCC और कानून-व्यवस्था पर भी रखी बात
मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक समरसता, समानता और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान समाज की मजबूती के लिए आवश्यक है। उन्होंने उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख करते हुए इसे समान कानूनी व्यवस्था की दिशा में उठाया गया कदम बताया।
उन्होंने धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक संपत्तियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और गौवंश के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया।
🎓 युवाओं को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर जोर
सीएम धामी ने कहा कि युवाओं को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और राष्ट्रीय दायित्वों की समझ भी होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रखने और शिक्षा, खेल, रोजगार तथा सकारात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई।
मुख्यमंत्री ने दून विश्वविद्यालय में स्थापित हिंदू अध्ययन केंद्र का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से भारतीय दर्शन, ज्ञान परंपरा, संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत के अध्ययन को प्रोत्साहन मिल रहा है।
🛕 केदारखंड और मानसखंड के धार्मिक स्थलों का विकास
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसके प्राचीन मंदिरों, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी है। राज्य सरकार धार्मिक स्थलों पर सुविधाएं बढ़ाने और इन धरोहरों को संरक्षित करने के लिए काम कर रही है।
उन्होंने केदारखंड मंदिर माला मिशन, मानसखंड मंदिर माला मिशन, हरिद्वार-ऋषिकेश गंगा कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और गोल्ज्यू कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने हरिपुर-कालसी में मां यमुना के तट पर यमुना स्नान घाट के लोकार्पण और मां यमुना की 21 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित किए जाने की जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि वहां मां यमुना मंदिर और भगवान श्रीकृष्ण मंदिर के निर्माण की योजना को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।
🙏 हरिद्वार कुंभ को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने आगामी वर्ष हरिद्वार में होने वाले कुंभ की तैयारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन धार्मिक आस्था के साथ देश की सांस्कृतिक एकता और आध्यात्मिक परंपराओं का भी प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि सरकार कुंभ के आयोजन को दिव्य, भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को मजबूत कर रही है। श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करना सरकार के प्रयासों में शामिल है।
🌟 अशोक सिंघल के आदर्शों से प्रेरणा लेने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल के जन्म शताब्दी वर्ष को सार्थक बनाने के लिए उनके विचारों और आदर्शों को व्यवहार में अपनाना जरूरी है। उन्होंने अखंड, सुरक्षित और स्वाभिमानी भारत के उनके संकल्प का उल्लेख करते हुए राष्ट्रहित और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में नागरिकों की भागीदारी पर जोर दिया।
कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष चंपत राय, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी महाराज, संत-महात्मा, विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।










