नई दिल्ली | 07 अक्टूबर 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे किए। इस अवसर पर दिल्ली में आयोजित ‘विकसित भारत संकल्प सभा’ में उन्होंने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को दोहराते हुए कहा कि देश इस संकल्प को पूरा करेगा। प्रधानमंत्री ने इस मौके पर अपने लंबे सार्वजनिक जीवन, जनता के विश्वास और आलोचनाओं से मिली सीख का भी उल्लेख किया।
2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत को 2047 तक विकसित देश बनाना है और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाना है। उन्होंने इस संकल्प को लेकर भरोसे के साथ कहा—“ये हम करके दिखाएंगे।”
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के साथ वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका से जुड़े कई लक्ष्यों का भी जिक्र किया। इनमें भारत को शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना, वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनना, ओलंपिक की मेजबानी करना और अंतरिक्ष के क्षेत्र में आगे बढ़ना शामिल रहा।
7 अक्टूबर 2001 से शुरू हुआ 25 साल का सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अनुसार उनके सरकार के मुखिया के रूप में 25 वर्षों का सफर 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के साथ शुरू हुआ था।
25 वर्ष पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा कि जब उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने नहीं सोचा था कि एक दिन वह इस पड़ाव तक पहुंचेंगे। उन्होंने इस सफर को जनता के लगातार विश्वास और समर्थन से जोड़ते हुए देशवासियों के प्रति आभार जताया।
‘मेरे लिए जनता ही भगवान है’ 🙏
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में जनता के विश्वास को अपने सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि आज वह जिस स्थिति में हैं और उन्हें जो जिम्मेदारियां मिली हैं, वे जनता के कारण हैं।
उन्होंने कहा कि देश के लोगों की सेवा करना उनके लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी है और उन्होंने ईश्वर से देश की सेवा के लिए और अधिक मेहनत करने की शक्ति देने की प्रार्थना की।
आलोचकों से मिली सीख का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री ने अपने राजनीतिक सफर के दौरान विरोध और आलोचनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनका विरोध किया, उनसे उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझने में मदद मिली।
उन्होंने यह भी कहा कि आलोचकों की बातों ने उन्हें अपने काम और फैसलों पर विचार करने का अवसर दिया। प्रधानमंत्री के मुताबिक आलोचना ने उन्हें खुद को बेहतर तरीके से समझने और अपने काम पर आत्ममंथन करने में मदद की।
‘आज भी खुद को छात्र मानता हूं’
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में सीखते रहने की आदत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्कूल के दिनों में वह कक्षा में सबसे पहले पहुंचने वाले विद्यार्थियों में रहते थे और सीखने की यह जिज्ञासा आज भी उनके जीवन का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि वह आज भी खुद को एक विद्यार्थी मानते हैं और जितना अधिक सीखेंगे, उतनी ही क्षमता के साथ देश के लिए काम कर सकेंगे।
कई कार्यक्रमों के जरिए मनाया गया अवसर
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें वडनगर और वाराणसी में हुए कार्यक्रम भी शामिल रहे।
इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन के अनुभव साझा करने के साथ-साथ आगे के राष्ट्रीय लक्ष्यों को लेकर भी अपना संकल्प सामने रखा।
विकसित भारत के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर 🇮🇳
प्रधानमंत्री ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर अपने संबोधन में दृढ़ संकल्प व्यक्त किया। उनके संदेश का केंद्र देश की विकास यात्रा को आगे बढ़ाना और राष्ट्रीय लक्ष्यों को पूरा करने के लिए सामूहिक प्रयास करना रहा।
25 वर्ष के इस पड़ाव पर प्रधानमंत्री ने अपने सार्वजनिक जीवन को व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय जनता के विश्वास और देश की सेवा से जोड़कर प्रस्तुत किया।










