देहरादून | 06 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड ने पूर्ण साक्षर राज्य बनने की महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे पूरे प्रदेश के लिए गौरव का क्षण बताते हुए कहा कि यह सफलता शिक्षकों, विद्यार्थियों, नव-साक्षरों, स्वयंसेवकों और अभियान से जुड़े लोगों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। 📚🇮🇳
मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम के बाद उत्तराखंड देश का छठवां पूर्ण साक्षर राज्य बना है।
पूर्ण साक्षरता के बाद अब नई चुनौती
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूर्ण साक्षरता को अंतिम पड़ाव नहीं माना जाना चाहिए। अब प्रदेश में डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, स्वास्थ्य जागरूकता और जीवन कौशल को बढ़ावा देने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा कि बदलते दौर में साक्षरता का मतलब केवल पढ़ना-लिखना या हस्ताक्षर करना नहीं है। व्यक्ति को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी होने के साथ-साथ तकनीक और वित्तीय व्यवस्थाओं को समझना भी जरूरी है।
नव-साक्षरों को किया सम्मानित 🎯
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान की परीक्षा सफलतापूर्वक पास करने वाले नव-साक्षरों को सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने नव-साक्षरों को बधाई देते हुए कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। शिक्षा व्यक्ति के आत्मविश्वास को मजबूत करती है और उसके सामने आगे बढ़ने के नए अवसर खोलती है।
उन्होंने कहा कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों और दूरस्थ क्षेत्रों वाले उत्तराखंड में पूर्ण साक्षरता का लक्ष्य हासिल होना प्रदेशवासियों की सामूहिक शक्ति और दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है।
25 हजार स्वयंसेवकों ने दिया योगदान
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि पूर्ण साक्षरता अभियान को सफल बनाने में करीब 25 हजार स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने बताया कि अब अगले छह माह में राज्य को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का राष्ट्रीय लक्ष्य है और उत्तराखंड इस लक्ष्य को इसी वर्ष हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में कई योजनाओं पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दे रही है।
उन्होंने बताया कि राज्य के 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।
इसके अलावा नंदा गौरा योजना के माध्यम से पात्र छात्राओं को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के तहत अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित की जा रही है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के 100-100 विद्यालयों में आधुनिक प्रयोगशालाएं विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
गांव में एक बच्चा पढ़ेगा तो स्कूल बंद नहीं होगा
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक बच्चे तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जिस गांव में एक भी बच्चा पढ़ने वाला होगा, वहां विद्यालय बंद नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में शिक्षा को समावेशी और आधुनिक बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षित व्यक्ति अपने परिवार और समाज के साथ राष्ट्र की प्रगति में भी योगदान देता है।
अब डिजिटल और वित्तीय साक्षरता पर फोकस 📢
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ण साक्षरता हासिल करने के बाद अब प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को बदलती तकनीक के साथ जोड़ना जरूरी है। इसके लिए डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के साथ स्वास्थ्य जागरूकता और जीवनोपयोगी कौशल को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, अपर सचिव भारत सरकार अर्चना शर्मा अवस्थी, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव नमामि बंसल सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।










