देहरादून में बाल संरक्षण पर सख्त निर्देश, 236 मामलों में 120 का निस्तारण; 6 बच्चे दत्तक ग्रहण के लिए मुक्त

देहरादून | 17 सितंबर 2026

देहरादून में बाल संरक्षण और पुनर्वास से जुड़े मामलों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को कार्रवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। पिछले तीन महीनों में बाल कल्याण समिति (CWC) के सामने 236 प्रकरण प्रस्तुत हुए, जिनमें 120 का निस्तारण किया जा चुका है।

वहीं संस्थागत बालगृहों में रह रहे 6 बच्चों को दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त किया गया है। बैठक में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

👧 हर मामले में बच्चे का हित सबसे ऊपर

कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी/अध्यक्ष जिला बाल संरक्षण इकाई, देहरादून डॉ. आशीष चौहान की अध्यक्षता में बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति (DCWPC), बाल कल्याण समिति (CWC), चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 तथा बाल भिक्षावृत्ति निवारण प्रयास/इंटेंसिव केयर सेंटर, साधु राम इंटर कॉलेज की त्रैमासिक समीक्षा बैठक हुई।

बैठक में बाल संरक्षण, पुनर्वास, दत्तक ग्रहण, शिक्षा, स्वास्थ्य के साथ बालश्रम, बाल विवाह और बाल भिक्षावृत्ति से जुड़े मामलों की प्रगति की समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रत्येक प्रकरण में बच्चे का सर्वोत्तम हित, उसकी सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और पुनर्वास प्राथमिकता में होना चाहिए। उन्होंने संबंधित विभागों और संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ मामलों का समयबद्ध निस्तारण करने के निर्देश दिए। लापरवाही सामने आने पर जवाबदेही तय करने को भी कहा गया।

📊 CWC में 236 मामले आए, 120 का निस्तारण

समीक्षा के दौरान बताया गया कि पिछले तीन महीनों में बाल कल्याण समिति के समक्ष 236 प्रकरण प्रस्तुत किए गए। इनमें से 120 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है।

संस्थागत बालगृहों में रहने वाले 6 बच्चों को दत्तक ग्रहण के लिए विधिक रूप से मुक्त किया गया। वित्तीय वर्ष 2026 में अब तक 5 बच्चों को दत्तक ग्रहण में दिया गया है।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2016 से अब तक जनपद देहरादून से कुल 109 बच्चों को देश और विदेश में दत्तक ग्रहण में दिया जा चुका है।

☎️ चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर भी आए मामले

चाइल्ड हेल्पलाइन-1098 की समीक्षा में बताया गया कि अप्रैल से जून के दौरान 200 प्रकरण प्राप्त हुए, जबकि जुलाई से अब तक 174 प्रकरण सामने आए हैं।

बैठक में बाल विवाह के 2 मामले और बालश्रम से जुड़े 46 प्रकरण प्राप्त होने की जानकारी दी गई।

जिलाधिकारी ने पारिवारिक समस्याओं और अन्य संवेदनशील मामलों में बच्चों एवं संबंधित परिवारों की काउंसलिंग के साथ नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

🏠 19 बालगृहों की व्यवस्थाओं की हुई समीक्षा

देहरादून जनपद में संचालित 19 राजकीय एवं स्वैच्छिक बालगृहों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई।

जिलाधिकारी ने इन संस्थानों में बच्चों के आवास, भोजन, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं को निर्धारित मानकों के अनुरूप बनाए रखने को कहा। सामने आने वाली कमियों का समयबद्ध समाधान करने के निर्देश भी दिए गए।

समीक्षा अवधि में बालगृहों के 16 निरीक्षण किए गए।

इन संस्थाओं में कार्यरत 156 कार्मिकों में से 138 का पुलिस सत्यापन पूरा हो चुका है। शेष कार्मिकों का सत्यापन भी जल्द कराने के निर्देश दिए गए।

🪪 302 बच्चों के दस्तावेजों की भी हुई पड़ताल

बालगृहों में रह रहे 302 बच्चों की दस्तावेजी स्थिति की समीक्षा में बताया गया कि अब तक 236 बच्चों के आधार कार्ड, 95 के आयुष्मान कार्ड और 116 के राशन कार्ड बनाए जा चुके हैं।

इन बालगृहों में रहने वाले 219 बच्चे विद्यालयों में अध्ययनरत हैं। शेष बच्चों के आवश्यक दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर तैयार कराने के निर्देश दिए गए।

🚸 रेस्क्यू अभियान में 744 बच्चे चिन्हित

बाल भिक्षावृत्ति और बालश्रम उन्मूलन अभियान की समीक्षा के दौरान बताया गया कि दिसंबर 2024 से अब तक 744 बच्चों को चिन्हित/रेस्क्यू किया गया है।

इनमें:

  • 111 बाल भिक्षावृत्ति से जुड़े बच्चे
  • 173 कूड़ा बीनने वाले बच्चे
  • 101 बालश्रम से जुड़े बच्चे
  • 307 ड्रॉपआउट बच्चे
  • 52 अन्य श्रेणी के बच्चे

शामिल हैं।

इनमें से 216 बच्चों का विद्यालयों में प्रवेश कराया जा चुका है।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि बच्चों को रेस्क्यू करने के बाद कार्रवाई वहीं समाप्त न हो। उनके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, काउंसलिंग और पुनर्वास की दिशा में प्रभावी फॉलोअप सुनिश्चित किया जाए।

📚 मिशन वात्सल्य के तहत समितियों को सक्रिय करने के निर्देश

जिलाधिकारी ने मिशन वात्सल्य के तहत ब्लॉक, ग्राम, नगर निकाय और वार्ड स्तर पर गठित बाल संरक्षण समितियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए।

उन्होंने उपलब्ध अनटाइड अनुदान की 5 प्रतिशत धनराशि नियमानुसार बच्चों के कल्याण और सुरक्षा पर खर्च करने को कहा।

इसके साथ ही अनाथ एवं परित्यक्त बच्चों के प्रमाण पत्र और जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने, दत्तक ग्रहण से संबंधित कार्रवाई, अन्य राज्यों के बच्चों को उनके गृह राज्य भेजने तथा बच्चों के अभिलेखों को अद्यतन रखने की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए।

🤝 कई विभागों के अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट हर्षिता सिंह, अध्यक्ष जिला बाल कल्याण समिति नमिता ममगाईं, जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, जिला शिक्षा अधिकारी प्रेमलाल भारती, पुलिस क्षेत्राधिकारी वंदना वर्मा, जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपांकर घिल्डियाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी बाल विकास जितेंद्र कुमार सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में विभागों के बीच बेहतर समन्वय, समयबद्ध कार्रवाई और बच्चों के पुनर्वास के बाद लगातार निगरानी पर विशेष जोर दिया गया।