नई दिल्ली | 15 सितंबर 2026
करीब आठ दशक से लंबित किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को अब आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है। नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच परियोजना को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे लंबे इंतजार के बाद परियोजना को धरातल पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उनके मुताबिक किशाऊ परियोजना जल सुरक्षा, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़ी है।
🤝 छह राज्यों की सहमति से आगे बढ़ी परियोजना
किशाऊ परियोजना को लेकर हुए समझौते में छह राज्य शामिल हैं—हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल सहित संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद रहे।
यह परियोजना लंबे समय से विभिन्न स्तरों पर लंबित थी। 16 जून 2026 को केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच परियोजना को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी थी। उस बैठक में MoU की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति बनी थी।
🏔️ 1940 में हुई थी परियोजना की परिकल्पना
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार किशाऊ परियोजना की कल्पना वर्ष 1940 में की गई थी। इसके बाद कई दशकों तक इसे आगे बढ़ाने के प्रयास होते रहे, लेकिन अलग-अलग कारणों से परियोजना क्रियान्वित नहीं हो सकी।
अब छह राज्यों के बीच हुए समझौते के बाद इसके कार्यान्वयन की प्रक्रिया को गति मिली है। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों के प्रति आभार भी जताया।
💧 1562 MCM क्षमता का जलाशय, 422 MW बिजली
किशाऊ परियोजना के तहत लगभग 1562 MCM क्षमता का जलाशय बनने और 422 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता विकसित होने की बात मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कही है।
परियोजना का प्रभाव उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान तक जुड़े अपर यमुना बेसिन पर पड़ने की बात कही गई है।
केंद्र सरकार के अनुसार परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह सहभागी राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।
🌊 यमुना के पुनर्जीवीकरण से भी जुड़ी परियोजना
किशाऊ परियोजना को केवल बांध और बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं माना जा रहा है। इसका एक महत्वपूर्ण उद्देश्य यमुना नदी में स्वच्छ जल के प्रवाह को बढ़ाना और उसके पुनर्जीवीकरण की दिशा में योगदान देना भी है।
16 जून की बैठक में केंद्र और राज्यों के बीच इस बात पर भी सहमति बनी थी कि हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान को दिया जाएगा तथा इसके बदले परियोजना के विद्युत घटक में हिमाचल प्रदेश के हिस्से की लागत साझा की जाएगी।
🏠 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास बड़ी प्राथमिकता
परियोजना के निर्माण के साथ उत्तराखंड के सामने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की चुनौती भी होगी।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का उचित, संवेदनशील और सम्मानजनक पुनर्वास राज्य सरकार की प्राथमिकता रहेगा। विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी उन्होंने जोर दिया।
🌳 करीब 2500 हेक्टेयर वन भूमि का मुद्दा
परियोजना के लिए लगभग 2500 हेक्टेयर वन भूमि के हस्तांतरण की आवश्यकता बताई गई है। इसके चलते क्षतिपूरक वनीकरण के लिए भी बड़ी मात्रा में भूमि की जरूरत होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड जैसे वनाच्छादित पर्वतीय राज्य के लिए इतनी बड़ी मात्रा में भूमि उपलब्ध कराना चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने केंद्र सरकार और सहभागी राज्यों से क्षतिपूरक वनीकरण के लिए आवश्यक भूमि चिन्हित करने में सहयोग का अनुरोध किया।
उत्तराखंड सरकार ने परियोजना से जुड़े पर्यावरण और वन संबंधी प्रावधानों का नियमानुसार पालन सुनिश्चित करने की बात कही है।
🎯 धामी बोले—सिर्फ समझौता नहीं, आगे बढ़ने का अहम पड़ाव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि MoU पर हस्ताक्षर महज औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि दशकों से लंबित परियोजना को आगे ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और सभी सहभागी राज्य सरकारों के समन्वय से किशाऊ परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा।
परियोजना के पूरा होने पर जल उपलब्धता, सिंचाई, पेयजल, ऊर्जा उत्पादन और यमुना के पुनर्जीवीकरण से जुड़े लक्ष्यों को गति मिलने की उम्मीद जताई गई है।
🇮🇳 कौन-कौन रहे मौजूद?
समझौते के दौरान केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद रहे।
किशाऊ परियोजना को लेकर छह राज्यों की सहमति के बाद अब इसके आगे के क्रियान्वयन और संबंधित प्रक्रियाओं पर काम आगे बढ़ेगा।










