🧵 ‘GRWM’ वीडियो बनाइए… प्रधानमंत्री मोदी की देशवासियों से खास अपील, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बढ़ाएं भारत की हैंडलूम विरासत

नई दिल्ली | 7 अगस्त 2026

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से भारत की समृद्ध हथकरघा परंपरा को नई पहचान देने की अपील की है। उन्होंने लोगों से अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पाद पहनकर GRWM (Get Ready With Me) समेत अन्य वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने और #NationalHandloomDay का उपयोग करने का आग्रह किया, ताकि देश के बुनकरों और कारीगरों को व्यापक प्रोत्साहन मिल सके। 🇮🇳

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की हथकरघा विरासत केवल पारंपरिक वस्त्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की सांस्कृतिक पहचान, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों की आजीविका से भी जुड़ी हुई है।

बुनकरों और कारीगरों के योगदान को किया नमन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह दिन भारत की समृद्ध और जीवंत हथकरघा विरासत का उत्सव मनाने का अवसर है।

उन्होंने देशभर के बुनकरों और कारीगरों के कौशल, रचनात्मकता और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पीढ़ियों से अपनी कला के माध्यम से भारतीय परंपराओं को संरक्षित और समृद्ध बनाया है।

‘GRWM’ वीडियो साझा करने की दी अपील

प्रधानमंत्री ने लोगों से कहा कि वे अपने पसंदीदा हैंडलूम उत्पादों के साथ वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा करें। उन्होंने विशेष रूप से GRWM (Get Ready With Me) वीडियो का भी उल्लेख किया और कहा कि सभी लोग #NationalHandloomDay हैशटैग के साथ अपनी पोस्ट साझा करें।

उनका मानना है कि इससे भारतीय हथकरघा उत्पादों को अधिक पहचान मिलेगी और इस क्षेत्र से जुड़े बुनकरों व कारीगरों को प्रोत्साहन मिलेगा। 📢

ग्रामीण सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत से जोड़ा

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार हथकरघा क्षेत्र को लगातार समर्थन देती रहेगी। उन्होंने इसे ग्रामीण सशक्तिकरण, महिला नेतृत्व वाले विकास और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प का महत्वपूर्ण आधार बताया।

उन्होंने कहा कि हथकरघा क्षेत्र का सशक्त होना न केवल पारंपरिक कला के संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार को भी मजबूती देता है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस क्यों है खास?

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य देश की समृद्ध हथकरघा विरासत का सम्मान करना, बुनकरों और कारीगरों के योगदान को पहचान देना तथा भारतीय हस्तनिर्मित वस्त्रों के प्रति लोगों को जागरूक करना है।